
रविवार का दिन देहरादून के लिए केवल एक तिथि नहीं,बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का स्मरणीय अध्याय बन गया। श्री श्री बालाजी सेवा समिति (रजिस्टर्ड), देहरादून द्वारा आयोजित 52 निर्धन एवं ज़रूरतमंद परिवारों की कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह ने पूरे शहर को भावनाओं से जोड़ दिया।करीब 11:30 बजे बारात का हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज, लक्ष्मण चौक परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया।इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल एवं राजपुर विधायक श्री खजान दास की गरिमामयी उपस्थिति रही।दोनों जनप्रतिनिधियों ने नवदंपत्तियों को आशीर्वाद देते हुए इस आयोजन को सामाजिक समरसता और मानवीय सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। इसके बाद दोपहर 1 बजे उत्तराखंड की लोकसंस्कृति से सजे मांगलिक मंगल गीतों ने वातावरण को भक्तिमय और सांस्कृतिक बना दिया।मंगल गीतों के उपरांत विधिवत जयमाला समारोह संपन्न हुआ।
दोपहर 2 बजे प्रतिभोज आयोजित किया गया,जिसमें समाज के हर वर्ग के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रतिभोज किया— यह दृश्य सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण था। सायं 4 बजे के आसपास वैदिक मंत्रोच्चार और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सभी 52 जोड़ों के सात फेरे संपन्न कराए गए। अग्नि को साक्षी मानकर लिए गए ये फेरे नवदंपत्तियों के नए जीवन की मजबूत नींव बने।
शाम 9 बजे के करीब विदाई का क्षण आया—
वह पल जिसने पूरे आयोजन को भावनाओं से भर दिया।
जब बेटियां विदा हुईं, तो देखने वाला हर व्यक्ति भावुक हो उठा,
चाहे वह परिचित हो या कोई अनजान राहगीर।
समिति की ओर से सभी 52 नवविवाहित जोड़ों को उपहार स्वरूप 175 से अधिक घरेलू उपयोग की सामग्री प्रदान की गई।
इनमें ड्रेसिंग टेबल, कुर्सियां, बेड, अलमारी, डिनर सेट
तथा गृहस्थ जीवन में आवश्यक अन्य सामग्री शामिल थी,
जिससे बेटियों को ससम्मान विदा किया गया।

इस आयोजन की मानवीय संवेदनशीलता तब और अधिक उजागर हुई,जब यह जानकारी सामने आई कि चार कन्याएं मूल रूप से उत्तर प्रदेश की निवासी थीं, जिनका विवाह भी समान सम्मान और आत्मीयता के साथ कराया गया।
वहीं तीन कन्याएं ऐसी थीं जिनके माता-पिता दोनों जीवित नहीं थे
उनका कन्यादान सामूहिक न होकर व्यक्तिगत रूप से किया गया,जिसने उपस्थित हर व्यक्ति को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवियों, गणमान्य नागरिकों और आम जनता ने श्री श्री बालाजी सेवा समिति के इस पुनीत कार्य की
खुले मंच से सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
समिति ने यह भी घोषणा की कि आगामी अप्रैल माह में एक बार फिर निर्धन एवं ज़रूरतमंद कन्याओं के सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तिथि की जानकारी शीघ्र ही सार्वजनिक की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार इस सेवा का लाभ उठा सकें।

52 दूल्हों की एक कतार, ढोल-नगाड़ों की गूंज और नम आंखें—देहरादून ने देखा सेवा और संस्कार का ऐतिहासिक संगम">



















