
देहरादून। यदि अधिकारी पद की गरिमा के साथ संवेदनशीलता, सादगी और जनसेवा का भाव भी जोड़ दे, तो वह केवल प्रशासक नहीं, बल्कि जनता का भरोसा बन जाता है। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने अपने कार्यकाल में यही साबित किया है।

2009 बैच के आईएएस अधिकारी सविन बंसल मूल रूप से हरियाणा से हैं। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र से बीटेक और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से रिस्क एवं डिजास्टर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्राप्त की। यूपीएससी परीक्षा में दूसरे प्रयास में वर्ष 2008 में 34वीं रैंक हासिल कर उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान प्राप्त किया।
जनसेवा को प्राथमिकता
देहरादून में जिलाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल विकास और जनकल्याण पर केंद्रित रहा है। उनकी कार्यशैली फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं के समाधान तक पहुंचती है।
• मिड-डे मील की गुणवत्ता की जांच: उन्होंने अक्षय पात्र रसोई का निरीक्षण कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
• परिवार को टूटने से बचाया: एक बुजुर्ग दंपति के पारिवारिक विवाद में हस्तक्षेप कर समझौता कराया।
• शिक्षिका को न्याय दिलाया: लंबित वेतन और प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए।
• राइफल क्लब फंड से सहायता: जरूरतमंदों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया।
• नगर निगम में सुधार: 21 वर्ष पुरानी कार्यप्रणाली में बदलाव कर सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग मजबूत की।
• लोकरत्न हिमालय सम्मान: असाधारण प्रशासनिक कार्यशैली के लिए सम्मानित।
जर्जर स्कूलों पर सख्त कार्रवाई
हाल ही में देहरादून जिले के 79 जर्जर स्कूल भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर डीएम सविन बंसल चर्चा में रहे। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार सुरक्षित वातावरण में ही संभव है।
आपदा हो या सामाजिक पहल, हर जगह मौजूद
प्राकृतिक आपदा, राहत कार्य, स्वास्थ्य शिविर या विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाली योजनाएं—हर क्षेत्र में उनकी सक्रिय उपस्थिति देखने को मिलती है। यही कारण है कि जनता उन्हें केवल एक आईएएस अधिकारी नहीं, बल्कि अपने सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले जनसेवक के रूप में देखती है।
उनकी प्रशासनिक दृष्टि में अनुशासन और मानवीय संवेदना का संतुलन साफ दिखाई देता है। उन्होंने यह साबित किया है कि जब अधिकारी समाज से जुड़कर काम करता है तो सरकार और जनता के बीच की दूरी स्वतः कम हो जाती है।
देहरादून में उनका कार्यकाल प्रशासनिक प्रतिबद्धता और मानवता का संतुलित उदाहरण बनकर उभरा है।
लेखिका:
रूपाली वशिष्ठ
पीएचडी विद्वान

रूपाली वशिष्ठ ने अपनी पुस्तक लाखामंडल एवं भावनाओं के पंख भी डीएम सईवन बंसल जी को भेंट की">



















