
नागपुर, महाराष्ट्र: 27 और 28 दिसंबर 2025 को नागपुर में आयोजित 23वें अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन हिंदी साहित्य सम्मेलन में देहरादून की पीएचडी स्कॉलर और लेखक रूपाली वशिष्ठ को विशेष सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से ‘साहित्य शिरोमणि पुरस्कार’ से नवाज़ा गया।
कार्यक्रम में रूपाली वशिष्ठ ने अपनी पुस्तकें ‘संघर्ष से शौर्य तक’ और ‘एडवोकेट क्रांति महाजन (बायोग्राफी)’ का विमोचन किया। यह पुस्तकें भारत के सभी वीर योद्धाओं पर आधारित हैं – प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक के शूरवीरों की वीर गाथाओं और संघर्ष की कहानियों को समेटती हैं। पुस्तक विमोचन की शोभा बढ़ाते हुए दोनों पुस्तकें किंग ऑफ नागपुर श्रीमंत मुधोजी राजे भोसले, वीर शिरोमणि तानाजी मालुसरे के वंशधर सूबेदार कुणाल मालुसरे, और उत्तर प्रदेश के संस्कृति मंत्री यशवंत निकोसे के हाथों से विमोचित की गईं।

इससे पहले रूपाली वशिष्ठ की तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं – ‘लाखामंडल’, ‘भावनाओं के पंख’, और ‘मेरी कलम से’, जिनमें ‘लाखामंडल’ के लिए उन्हें देहरादून में देवभूमि रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
कार्यक्रम के आयोजक एडवोकेट डॉ. क्रांति महाजन थे, जिन्होंने पिछले कई वर्षों से साहित्य और बौद्धिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करते आ रहे हैं।
इस साहित्यिक अवसर में रूपाली वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित होकर कई पुरस्कार वितरण किए। उन्होंने अपने प्रेरक भाषण में कहा कि,

अगर व्यक्ति में लगन और मेहनत है, तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। यदि हम अपने देश को विकसित बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें खुद को विकसित करना होगा। तभी हमारा देश सशक्त और समृद्ध बन सकता है।”
रूपाली वशिष्ठ का यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान और युवाओं को प्रेरित करने वाली दृष्टि का प्रतीक है, और उनके प्रयास भारतीय वीरता और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

रूपाली वशिष्ठ को नागपुर में हिंदी साहित्य सम्मेलन में मिला साहित्य शिरोमणि पुरस्कार">



















